श्रावण मास का महत्व | Importance of Shravan

प्रश्न: श्रावण मास का क्या महत्व है ?

गुरुदेव: सारा संसार ईश्वर का रूप है और उस पर जलधारा सावन मास में हो रही है| प्रकृति इस धरती को अभिषेक कर रही है; जल चढ़ा रही है | इसी की नक़ल हम भी करते हैं, सावन में हम भी थोड़ा सा जल चढ़ा देते हैं शिव जी के ऊपर | और अपने आप को कृतार्थ समझते हैं कि हम भी इश्वर के हैं | इसी कृत्य के साथ जुड़ गए, बस यही है ! हर महीने का कुछ न कुछ, जैसे ज्येष्ठ का कुछ है, फिर सावन का कुछ है, फिर आगे हम कहते हैं कार्तिक मास बड़ा विशेष है, तो कौन सा मास ऐसा है बताओ न, जहाँ पर कोई त्यौहार नहीं हो हिंदुस्तान में ? सावन-भादव में बारिश होती है, गर्मी से ठंढक मिलती है लोगों को | ऐसे ही मन की जो बेखुदी है, दर्द है, समस्याएँ हैं ; ज्ञान का श्रवण करने से, मन को ठंढक पहुंचती है| ज्ञान का अभिषेक हो मन के ऊपर तो, मन शांत होता है; ठंढा होता है | ऐसे ही तपती हुई धरती पर वर्षा होती है, तो धरती को ठंढक पंहुचती है और फल-फूल उगते हैं, पेड़ों में पत्ते-फूल सब लगने लगते हैं| बारिश से सिंचन होता है न ! और प्रकृति फलप्ती है, पानी ही जीवन है और वह जीवन उतरता है धरती पर | पानी के बिना कैसे जीवन हो सकता है ?
श्रावण मने श्रवण | श्रवण मने क्या? जिस महीने में बैठ के कथाएं सुनते हैं | ईश्वर का गुणगान सुनते हैं, तो हमारे भीतर तसल्ली होती है | इसलिए श्रावण मास की यही विशेषता है| और श्रावण मास में, बारिश के मौसम में लोग बाहर नहीं जाते थे | सन्यासियों के लिए भी यही था | पहले संन्यासी घूमते थे जगह-2 और उनको कहा गया चातुर्मास | (चातुर्मास कहते हैं, मगर चातुर्मास को केवल दो महीने में ही ख़तम कर देते हैं | पहले तो पूरा चातुर्मास करते थे|) एक साधु, सन्यासी, महात्मा एक किसी जगह पर एक गाँव में, किसी शहर में रह जाते थे 4 महीने | जब 4 महीने रहते तब सारे भक्त आते, उनकी बातें सुनते | खेतों में कुछ काम भी नहीं होता बारिश जब होती है तो, सब प्रकृति देख लेती है | बैठ के कथाएँ सुनों, गीत गाओ, प्रसन्न रहो |