‘मैंने एक बहुत प्यारे से शिशु को जन्म दिया......लेकिन, मैं अवसादग्रस्त हूँ।’- ध्यान प्रसव के पश्चात होने वाले अवसाद से उबरने में किस प्रकार से आपकी मदद कर सकता है?
बधाई हो! आपका बच्चा बहुत प्यारा है। मैं इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकती कि आपको कितना गर्व और खुशी महसूस होनी चाहिए!
धन्यवाद। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि प्रत्येक व्यक्ति वैष्णवी ( बदला हुआ नाम ) की प्रतिक्रिया को सुनने का इच्छुक नहीं है। शायद उन्हें लगा कि वह बहुत थकी हुई है।
वैष्णवी को हमेशा से एक लड़की चाहिए थी। लेकिन अब उसे सब संतोषजनक नहीं लग रहा था। पहले,वह बच्ची को दूध नहीं पिला पा रही थी, फिर,जब बच्ची ने दूध पी लिया,तो ऐसा लगा कि बच्ची के पेट में दर्द हो रहा है। वह दूध पीने के बाद रोने लगी और वह कब नहीं रो रही थी। वह वैष्णवी के सी सेक्शन के टांकों पर बार - बार पैर मारकर उसके कम होते हुए धैर्य की परीक्षा सी लेती हुई प्रतीत हो रही थी ! स्थिति तब और भी ज्यादा खराब हो गई, जब वह किसी और की गोद में बिल्कुल भी नहीं जा रही थी। जब कोई वैष्णवी को राहत देने का प्रयास करता था, तो वह भी परेशान हो जाता था!
उसके सहयोगी पति ने दूध पिलाने के लिए उसे एक सुंदर गुलाबी तकिया लाकर दिया था, ताकि उसे बच्ची को बार - बार गोद में ना लेना पड़े। उसने अपनी पत्नी और बच्ची की देखभाल करने के लिए ऑफिस से छुट्टी भी ले ली थी। फिर भी,वैष्णवी को महसूस हो रहा था कि उस पर बहुत अधिक भार हो गया है।
इसके विपरीत, उसके भीतर एक निर्वात सा छा गया था, जिसके कारण उसे बहुत भारीपन के साथ - साथ खालीपन भी महसूस हो रहा था। वैष्णवी ने अपने आप से कहा कि वह एक सोने की खदान की तरह है, जिससे सोना निकाल लिया गया है।
अन्ततः,उसके डॉक्टर ने उसकी समस्या की ओर संकेत किया और उसे नाम दिया : प्रसव के पश्चात होने वाला अवसाद। अवसाद?? एक स्वस्थ बच्चा होने के पश्चात? ' मुझे क्या हो गया है ? ' ,यह उसके मन में आया पहला विचार था। ' क्या मैं नियंत्रण को खोती जा रही हूँ? '
नहीं,वैष्णवी पागल नहीं थी। वह वास्तव में प्रसव के पश्चात होने वाले अवसाद का अनुभव कर रही थी।
प्रसव के पश्चात होने वाले अवसाद के संभावित कारण
- अनियोजित गर्भावस्था या जल्दी या देर से होने वाली गर्भावस्था
- लंबी / कठिन प्रसव पीड़ा या डिलीवरी,सी सेक्शन में जटिलताएं
- प्रसव के पश्चात होने वाली पीड़ा
- थकान और अपर्याप्त नींद
- हार्मोनल बदलाव
- पति या परिवार की ओर से सहयोग में कमी
- नौकरी को लेकर चिंता
- जीवनशैली या जीवन जीने के तरीके में भारी बदलाव
- बच्चा अस्वस्थ है और लगातार बीमार या विशेषकर विकलांग है।
- अवसाद का पारिवारिक इतिहास हो।
- जीवन में मानसिक आघात हुआ हो,जैसे- किसी पारिवारिक रिश्तेदार की मृत्यु या बीमारी।
- नई - नई बनी मां के एक विलक्षण मां होने की अस्वाभाविक अपेक्षाएं,जो सबकुछ संभाल सकती है।
प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण
शांति से, अचानक और जोरदार ढंग से होने वाला यह अवसाद धीरे - धीरे आपके सारे आनंद को चूस लेता है, आपकी ऊर्जा को छीन लेता है और आपको खाली महसूस करने के साथ छोड़ देता है। अजीब ढंग से,आप कभी-कभी दुख महसूस करने के बजाय कुछ भी नहीं महसूस करते हैं।
१ .पतन
यहां एक असुखद तथ्य है कि लोग आपको मां बनने के बारे में नहीं बताते हैं।सभी माताएं प्रसव के पश्चात थोड़ा बीमार सा महसूस करने लगती हैं। बच्चा हो जाने के पश्चात, हो सकता है कि शायद आपको एकदम से या हर बार स्पष्ट रूप से खुशी ना हो। प्रसवोत्तर अवसाद में प्रारंभिक समायोजन के पश्चात भी आपके मूड में बदलाव नहीं आता है।
२. चिंता एवम् आत्मग्लानि
यह भावना कि बच्चा होने पर आपको जितना अधिक रोमांचित महसूस करना चाहिए था, उतने रोमांचित आप नहीं हुए, धीरे - धीरे आपके भीतर आत्मग्लानि भर देती है। यदि आप एक कामकाजी मां हैं, तो आप बच्चे के लिए अपना दूध पंप की सहायता से बोतल में भरकर रख देंगी। बोतल से दूध पीने वाले बच्चों को संक्रमण होने की संभावना सदैव अधिक होती है। चिंता के ये विचार,जो अवसाद की गहराई में कहीं दबे हुए थे, आपकी बहुमूल्य और टूटी हुई नींद को थोड़ा खराब कर सकते हैं।
३ . दुख की घड़ियां
ऐसा भी समय आता है,जब आप में तनाव और दबाव बढ़ने लगता है और आप बिना किसी कारण के चिड़चिड़ाने लगते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि आप अचानक ही बिना किसी चेतावनी के अपने तकिए में मुंह छिपाकर रोने लगें। प्रसवोत्तर अवसाद में प्रायः ऐसा होता है।
४. बच्चे से कोई जुड़ाव महसूस ना करना
सामान्यतः जब आप अपने नवजात बच्चे को देखते हैं,तो आप उसे निकटता से गोद में लेना चाहते हैं और लाखों बार चूमना चाहते हैं। यह भावना उस मां में नहीं होती है, जो प्रसवोत्तर अवसाद का अनुभव कर रही है। आप अपने नन्हे शिशु से अलगाव की भावना या भावनाओं की कमी को महसूस कर सकते हैं। गंभीर मामलों में, कुछ मांएं अपने बच्चों को नुकसान पहुंचाती हैं।
बहुत सारी महिलाएं नहीं जानती हैं कि क्या करें या किस के पास जाएं। गंभीर परिणामों से बचने के लिए, असहाय अवस्था और निराशा का समय पर उपचार करना चाहिए।
प्रसवोत्तर अवसाद का उपचार कैसे करें
प्रसवोत्तर अवसाद का उपचार करने के कई तरीके हैं। कुछ डॉक्टर आपको इसे अपने आप ही ठीक हो जाने की प्रतीक्षा करने का परामर्श देंगे, जैसा कि वैष्णवी ने किया! यदि यह तरीका आपके लिए काम करता है,तो बहुत अच्छा होगा!
अन्य डॉक्टर आपको दवाई लेने का परामर्श देंगे। दवाईयों के साथ समस्या यह है कि वे अवसाद को संभालने का एक अस्थाई उपाय हैं। आप कितने समय तक दवाईयां लेंगे? यह आपके स्तनों से निकलने वाले दूध और आपके मूड को प्रभावित कर सकती हैं,आपको अपने बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ बना सकती हैं।
फिर भी,कुछ लोग आपको ध्यान करने की सलाह देंगे! हम तीसरी श्रेणी में आते हैं: ध्यान चिकित्सा श्रेष्ठ है।
यहां बताया गया है कि इस संकट की घड़ी में ध्यान आपकी किस प्रकार से मदद कर सकता है।
१. विश्राम
यह ध्यान के द्वारा दिया गया सबसे अच्छा उपहार है।अपनी श्वास और स्वयं पर ध्यान केंद्रित कर के,ध्यान आपको वर्तमान क्षण में स्थिर कर देता है और स्वयं का अनुभव कराता है। जब आप केवल इस बारे में सोचते हैं कि उस क्षण में आप क्या कर रहे हैं, तब आप महसूस करते हैं कि आपके मन का बोझ हल्का होने लगता है। आप एक कोमल एवम् विश्राम से युक्त स्थान में डूब जाते हैं, जो आपको अपनी शक्ति को इकट्ठा करने और आपके नए जीवन का सामना करने में मदद करता है।
२. स्पष्टता एवम् आत्मविश्वास
नवजात बच्चे का जीवन आपके हाथों में है। अचानक ही,आपको प्रश्न पूछने के लिए एक मेजबान मिल जाता है, जिसके प्रश्नों का उत्तर आपको देना पड़ता है और उन पर कार्य करना पड़ता है। शायद आपको इसका बिल्कुल भी अनुभव ना हो। क्या आपके बच्चे को पीलिया हो गया है? क्या यह सामान्य बात है? क्या बच्चा ठीक से दूध पी रहा है और क्या दूध ठीक से उसको पच रहा है? आप बच्चे को ठोस भोजन और पानी देना कब आरंभ करते हैं? क्या उसके मल का रंग ठीक है?
यह सारी जिम्मेदारी आपके योग्य,लेकिन थके हुए कंधों पर आ जाती है। ध्यान आपको कुछ प्रयास करने के समय में स्पष्ट एवम प्रभावशाली तरीके से सोचने में मदद करता है। यह आपमें तनाव के बजाय आत्मविश्वास लेकर आता है,क्योंकि यह आपको शांतिपूर्ण तरीके एवम आत्मविश्वास के साथ कार्य आरंभ करने में मदद करता है। जब आप इन बातों को एक साथ संभालने के बजाय एक - एक करके संभालते हैं, तो ये आपके रास्ते में विकट अवरोध नहीं बनते हैं।
३. सजगता
बच्चे अपनी भूख,थकावट,नींद,बेचैनी,दर्द और मां के पास लेटने की इच्छा को कई प्रकार से रोकर दर्शाते हैं। पर्याप्त नींद और विश्राम ना मिलने के कारण आप बच्चे की भाव भंगिमाओं को नहीं पहचान पाती हैं।आप उस समय परेशान हो जाती हैं कि रोते हुए बच्चे को कैसे संभालना है। यह बहुत निराशाजनक हो सकता है।
ध्यान आपकी बुद्धि को कुशाग्र एवम् सामंजस्य स्थापित करने में मदद करता है,ताकि आप बच्चे की आवश्यकता को समझ सकें। जब आप विभिन्न प्रकार से रोने की आवाज़ों को पहचान लेती हैं, तब आप अपने बच्चे के साथ एक विशेष जुड़ाव महसूस करती हैं। जैसे,बच्चा एक विशेष भाषा में संवाद करता है,जिसे केवल आप समझ सकती हैं। बच्चे से जुड़ाव का आरंभ होना,अवसाद से बाहर निकलने के लिए पहला कदम है।
तो,आप क्या कहते हैं? क्या आप एक बार कोशिश करना चाहेंगे?
मैं आपके जीवन के इस बिंदु पर,चरम समय के संकट एवम् अपने आप पर बिल्कुल भी ध्यान केंद्रित ना करने की अवस्था की प्रशंसा कर सकती हूँ। लेकिन,ध्यान करने के ये सरल तरीके आपकी नई दिनचर्या में सामंजस्यपूर्ण तरीके से शामिल हो जाएंगे।
प्रतिदिन २ - ३ बार योगनिद्रा करें
एक नई मां के रूप में,आप सबसे अधिक नींद से वंचित रहती हैं।और नौ महीने तक बच्चे को कोख में रखने और फिर प्रसव हो जाने के पश्चात, आपको विश्राम की अत्यधिक आवश्यकता होती है। जब आप सोने जाती हैं,तब भी आपका मन चिंता में फंसा रहता है।
योगनिद्रा आपके सोने के समय का अनुकूलन करती है और यह सुनिश्चित करती है कि जब आप विश्राम कर रही हों, तब आपको पूर्ण विश्राम मिले। जब आप सजगता से एक झपकी लेकर भी विश्राम करती हैं, तो जागने पर आप तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करती हैं।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर द्वारा निर्देशित ध्यान
एक मधुर आवाज़ में सब कुछ जाने देने, समर्पण और श्वास पर ध्यान केंद्रित करने में वह जादू भरा प्रभाव है, जो आपको शांत कर देता है और विश्राम प्रदान करता है। इस अवस्था में,आप अपने आगे आने वाली चुनौतियों को स्वीकार करने में सहज अनुभव रहेंगी। ध्यान में विश्राम करने से,आपकी जीवनशैली और शारीरिक बदलावों में संतुलन लाने में भी मदद मिलती है। एक साधारण सी नींद के पश्चात थोड़ा और सो लेने की चाह होती है,लेकिन ध्यान के पश्चात आप फिर से सजीव महसूस करती हैं।
सहज समाधि ध्यान
यह प्रयास रहित एवम् स्वाभाविक ध्यान आपको आपके भीतर की गहराई में ले जाता है,आपकी ऊर्जा के स्रोत और प्रेम तक ले जाता है। पहले पहल यह ध्यान कठिन हो सकता है क्योंकि आप बहुत थकी हुई होती हैं।आप जैसे ही अपनी शक्ति को फिर से प्राप्त कर लेती हैं, तब आप इसे सरलता से अपने ही ढंग से कर सकती हैं।
प्रसवोत्तर अवसाद से गुजर रही मां में कोई गलती नहीं निकाल सकता है। जितनी सामान्य गर्भावस्था एवं प्रसव की प्रक्रिया है, उसी प्रकार से यदि आप अपने नए जीवन को संभालने में किसी की मदद चाहती हैं, तो यह ठीक ही तो है! आप किस स्थिति से होकर गुजर रही हैं,उसके बारे में खुलकर बात कीजिए,ताकि आप इस विषाद से जल्दी से जल्दी बाहर निकल सकें। और,याद रखिए कि स्थिति सदैव ऐसी नहीं रहेगी! आप शीघ्र ही वैसा जीवन फिर से जीने लगती हैं,जैसा आप पहले जीती थीं। ऐसा ना हो कि आप जीवन की इस सुंदर अवस्था का सुख ना ले पाएं।
मेरी डॉक्टर को गर्भावस्था और प्रसव एक मैराथन दौड़ने की तरह पसंद था।उसने मुझसे कहा," तुम बीमार नहीं हो। यह शरीर की एक सामान्य अवस्था है। लेकिन,जैसे आपको मैराथन में दौड़ने के पश्चात एक ब्रेक चाहिए होता है, वैसे ही आपको प्रसव के पश्चात स्वस्थ होने के लिए विश्राम और समय चाहिए होता है। तो, मदद करने के लिए किसी को बुला लीजिए। थोड़ा घूमने के लिए जाएं, घर से बाहर निकलें, अन्य चीजों का अनुभव करें और लगातार काम करने के बीच - बीच में थोड़ा विश्राम भी करें। लंबे समय के लिए, यह एक बहुत अच्छा उपहार होगा, जो आप अपने बच्चे को दे सकते हैं और वह है, एक स्वस्थ और प्रसन्न आप।
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( प्राजक्ति देशमुख,शिक्षक आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा दी गई निविष्टियों के अनुसार इसका लेखन अनुषा चेलप्पा ने किया है )











































